नई दिल्ली:
भारत में किराया बाजार को और पारदर्शी व सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने नए रेंट नियम (Rent Law 2025) लागू कर दिए हैं। इन नियमों का उद्देश्य किरायेदारों पर मकान मालिकों की मनमानी रोकना, अनुचित रेंट बढ़ोतरी पर नियंत्रण और सिक्योरिटी डिपॉज़िट को सीमित करना है। इससे देश भर के लाखों किरायेदारों को आर्थिक और कानूनी सुरक्षा मिलने की उम्मीद है। Default Site+1
🔹 मनमानी रेंट और डिपॉज़िट पर रोक
इन नए रेंट नियमों के तहत अब मकान मालिक मनमाने तरीके से रेंट बढ़ा नहीं सकते और न ही अत्यधिक सिक्योरिटी डिपॉज़िट ले सकते हैं। नियमों के अनुसार:
✔️ रेज़िडेंशियल (Residential) प्रॉपर्टी के लिए सिक्योरिटी डिपॉज़िट अधिकतम 2 महीने के रेंट तक ही लिया जा सकता है।
✔️ Commercial (व्यवसायिक) प्रॉपर्टी के लिए अधिकतम सिक्योरिटी डिपॉज़िट 6 महीने के रेंट तक ही सीमित रहेगा।
✔️ Rent केवल तभी बढ़ाया जा सकता है जब किराया अवधि 12 महीने पूरी हो और मकान मालिक किरायेदार को 90 दिन पहले लिखित नोटिस दे।
✔️ सभी रेंट एग्रीमेंट अब अनिवार्य रूप से रजिस्टर्ड होंगे और डिजिटल स्टैम्पिंग भी लागू किया जाएगा। Default Site+1
इन नियमों से पहले कई किरायेदारों को महीनों का एडवांस डिपॉज़िट जमा करना पड़ता था, जिससे नई नौकरी या दूसरे शहर में रहने आने वाले लोगों को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ता था। उदाहरण के लिए, बेंगलुरु में कुछ इलाकों में 70,000 रुपये मासिक रेंट और 5 लाख रुपये का डिपॉज़िट मांगा जाना सोशल मीडिया पर भी विवाद का विषय बना था।
🔹 रेंट एग्रीमेंट अब मजबूरी
अब कोई भी किराया समझौता लिखित रूप में नहीं बल्कि Digital या Online Registered Form में होना आवश्यक है। अगर किराया एग्रीमेंट 11 महीनों से ऊपर है तो उसे रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है, अन्यथा वह समझौता गैरकानूनी माना जाएगा। इससे झूठे या मौखिक अनुबंधों की समस्या से निपटना आसान होगा। Default Site
🔹 किराया विवाद और सुरक्षा
इन नए नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किराया विवाद, सिक्योरिटी डिपॉज़िट, रेंट बढ़ाने जैसी समस्याओं को निपटाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। मकान मालिक किरायेदार को बिना कारण घर खाली करने के लिए नहीं कह सकते और यह फैसला केवल Rent Tribunal या अदालत द्वारा ही लिया जा सकता है।
🔹 किरायेदारों को मिलेगा बड़ा सुरक्षा कवच
विशेष रूप से नए रेंट कानून के कारण किरायेदार अब यह अधिकार रखते हैं कि:
📌 मकान मालिक बिना मंजूरी के रेंट में बदलाव नहीं कर सकता।
📌 अनावश्यक रूप से बड़ी राशि डिपॉज़िट के रूप में जमा नहीं करवा सकता।
📌 नियमों के तहत उनके पास अपने अधिकारों के लिए शिकायत दर्ज करने और Rent Tribunal के पास जाने का मार्ग भी खुला रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना
अभियान और रेंट मार्केट विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव भारतीय किराया बाजार को ज़्यादा संतुलित, औपचारिक और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल किरायेदारों को राहत मिलेगी, बल्कि मकान मालिकों को भी सही तरीके से अपनी संपत्ति प्रबंधित करने में मदद मिलेगी। Default Site
📰 निष्कर्ष
सरकार द्वारा लागू किए गए Rent Law 2025 के नए नियमों से अब किरायेदारों पर मकान मालिकों की मनमानी नहीं चलेगी। नई शर्तें पारदर्शिता, सुरक्षा और कानूनी जवाबदेही को सुनिश्चित करती हैं। यह कदम खास तौर पर उन लोगों के लिए राहत का स्रोत बन रहा है जिनका आर्थिक बोझ पहले एडवांस रेंट और ज़्यादा डिपॉज़िट की वजह से भारी रहता था।

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