नाटक ‘दधीचि’ में कलाकारों का शानदार प्रदर्शन, दर्शकों ने की जमकर सराहना
मुंबई — हाल ही में मंचित नाटक ‘दधीचि’ ने दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई है। इस नाटक में कलाकारों की दमदार अदाकारी, सशक्त संवाद और भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया। नाटक को लेकर न केवल थिएटर में मौजूद दर्शकों, बल्कि समाचार पत्रों और रंगमंच से जुड़े लोगों द्वारा भी खूब सराहना मिल रही है।
🎭 निर्देशन और मुख्य भूमिका में अलोख वर्मा
इस नाटक के निर्देशक अलोख वर्मा हैं, जिन्होंने मंच पर शंकर सक्सेना के किरदार को भी बखूबी निभाया। एक निर्देशक के रूप में उनकी पकड़ और एक कलाकार के रूप में उनका प्रभावशाली अभिनय, दोनों ही देखने लायक रहे। शंकर सक्सेना के किरदार में उन्होंने गंभीरता, भावनात्मक गहराई और प्रभावशाली संवाद अदायगी से दर्शकों का दिल जीत लिया।
👩🎭 मंदिरा के किरदार में राधिका झा
नाटक में मंदिरा के किरदार में राधिका झा नजर आईं, जो शंकर सक्सेना की पत्नी की भूमिका में थीं। मंदिरा एक ऐसी महिला के रूप में प्रस्तुत की गई है जो अन्याय के खिलाफ खड़ी होती है और हमेशा सही का साथ देती है। राधिका झा ने इस किरदार को पूरी संवेदनशीलता और मजबूती के साथ निभाया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
🎬 अन्य प्रमुख कलाकारों का सशक्त अभिनय
नाटक में अरुणि के किरदार में उमेश ज़ांबरे ने प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने अभिनय से इस चरित्र को जीवंत बना दिया।
वहीं एकलव्य के किरदार में मनीष मिश्रा का अभिनय भी दर्शकों को खासा पसंद आया। उनके संवाद और भाव-भंगिमा ने चरित्र की गहराई को बखूबी दर्शाया।
⚔️ अभिमन्यु के रूप में हर्ष मोहन चौहान
हर्ष मोहन चौहान ने अभिमन्यु के किरदार को सशक्त और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उनके अभिनय में आत्मविश्वास और ऊर्जा साफ झलकती रही, जिसे दर्शकों ने तालियों के साथ सराहा।
🌟 अन्य सहायक किरदारों ने भी छोड़ी छाप
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संतोष के किरदार में विकास तिवारी नजर आए, जो शंकर सक्सेना के करीबी सहयोगियों में से एक हैं। उन्होंने इस भूमिका को बेहद सहजता से निभाया।
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पागल के किरदार में वरुण ने अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया।
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रंजन के रूप में सुहान मिश्रा और
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आजाद के किरदार में हरीश विधाते ने भी अपने-अपने पात्रों के साथ न्याय किया।
🎉 मुंबई में पहला मंचन, खूब मिल रही सराहना
यह नाटक मुंबई में पहला मंचन था और पहले ही प्रदर्शन में इसे दर्शकों से भरपूर प्यार मिला। कलाकारों की मेहनत, निर्देशन की स्पष्ट सोच और मजबूत कथानक ने नाटक ‘दधीचि’ को एक यादगार प्रस्तुति बना दिया।
✅ कुल मिलाकर
‘दधीचि’ नाटक न केवल अभिनय के स्तर पर मजबूत साबित हुआ, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों को भी प्रभावी तरीके से दर्शकों तक पहुंचाने में सफल रहा। यह नाटक रंगमंच प्रेमियों के लिए एक बेहतरीन अनुभव बनकर सामने आया है।

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